सियाह-रात पशेमाँ है हम-रकाबी से

सियाह-रात पशेमाँ है हम-रकाबी से

वो रौशनी है तिरे ग़म की माहताबी से

सबा के हाथ है अब इज़्ज़त-ए-निगाह मिरी

चमन महकने लगा गुल की बे-हिजाबी से

फ़रार उन से है मुश्किल वो दस्तरस में नहीं

ये ज़र्द ज़र्द से मौसम वो दिन गुलाबी से

लहू लहू नज़र आती है शाख़-ए-गुल मुझ को

खिले वो फूल तिरी ताज़ा इंक़िलाबी से

अजब नहीं है कि पा जाएँ क़ाफ़िले मंज़िल

हमारे नक़्श-ए-क़दम की सितारा-ताबी से

कोई किताब जो खोलें तो क्या पढ़ें 'फ़ाख़िर'

खुलीं निगाह में चेहरे अगर किताबी से

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Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se In Hindi By Famous Poet Ahmad Fakhir. Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se is written by Ahmad Fakhir. Complete Poem Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se in Hindi by Ahmad Fakhir. Download free Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se Poem for Youth in PDF. Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se is a Poem on Inspiration for young students. Share Siyah-raat Pasheman Hai Ham-rakabi Se with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.