बजाए कोई शहनाई मुझे अच्छा नहीं लगता

बजाए कोई शहनाई मुझे अच्छा नहीं लगता

मोहब्बत का तमाशाई मुझे अच्छा नहीं लगता

वो जब बिछड़े थे हम तो याद है गर्मी की छुट्टीयाँ थीं

तभी से माह जुलाई मुझे अच्छा नहीं लगता

वो शरमाती है इतना कि हमेशा उस की बातों का

क़रीबन एक चौथाई मुझे अच्छा नहीं लगता

न-जाने इतनी कड़वाहट कहाँ से आ गई मुझ में

करे जो मेरी अच्छाई मुझे अच्छा नहीं लगता

मिरे दुश्मन को इतनी फ़ौक़ियत तो है बहर-सूरत

कि तू है उस की हम-साई मुझे अच्छा नहीं लगता

न इतनी दाद दो जिस में मिरी आवाज़ दब जाए

करे जो यूँ पज़ीराई मुझे अच्छा नहीं लगता

तिरी ख़ातिर नज़र-अंदाज़ करता हूँ उसे वर्ना

वो जो है ना तिरा भाई मुझे अच्छा नहीं लगता

(3756) Peoples Rate This

Your Thoughts and Comments

Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta In Hindi By Famous Poet Amir Ameer. Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta is written by Amir Ameer. Complete Poem Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta in Hindi by Amir Ameer. Download free Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta Poem for Youth in PDF. Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta is a Poem on Inspiration for young students. Share Bajae Koi Shahnai Mujhe Achchha Nahin Lagta with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.