कुछ ऐसे वस्ल की रातें गुज़ारी है मैं ने

कुछ ऐसे वस्ल की रातें गुज़ारी है मैं ने

तमाम शब तेरी सूरत निहारी है मैं ने

अभी से सारा समुंदर उछाल मारता है

अभी तो दरिया में कश्ती उतारी है मैं ने

ये सारे रस्ते मुझे खींचने लगे है अब

कुछ इतना चीख़ के मंज़िल पुकारी है मैं ने

तमाम-उम्र तिरी जुस्तुजू रही मुझ को

तमाम-उम्र सफ़र में गुज़ारी है मैं ने

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Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine In Hindi By Famous Poet Amit Satpal Tanwar. Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine is written by Amit Satpal Tanwar. Complete Poem Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine in Hindi by Amit Satpal Tanwar. Download free Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine Poem for Youth in PDF. Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine is a Poem on Inspiration for young students. Share Kuchh Aise Wasl Ki Raaten Guzari Hai Maine with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.