अना

इक निगार-ए-तन्हाई

अंजुमन से नालाँ भी अंजुमन-तलब भी है

एक वहम-ए-यकताई

ज़िंदगी का सामाँ भी मौत का सबब भी है

इक जुनून-ए-दाराई

ख़ुद रक़ीब है अपना ख़ुद हरीफ़-ए-यज़्दाँ है

ख़्वाब है तो ईक़ाँ है वहम है तो ईमाँ है

इक हिसार-ए-आईना

संग-ज़न की ज़द में है

एक बे-कराँ क़ुल्ज़ुम

आब-ए-जू की हद में है

इक फ़ना का ज़िंदानी

हसरत-ए-अबद में है

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Ana In Hindi By Famous Poet Aziz Qaisi. Ana is written by Aziz Qaisi. Complete Poem Ana in Hindi by Aziz Qaisi. Download free Ana Poem for Youth in PDF. Ana is a Poem on Inspiration for young students. Share Ana with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.