उसे समझा-बुझा के हम तो हारे

उसे समझा-बुझा के हम तो हारे

न आया दिल ये क़ाबू में हमारे

सुन ऐ ग़ाफ़िल जरस क्या कह रहा है

पड़ा रह तू हम अपनी रह सुधारे

कोई आता नहीं हो जब मदद को

सिवा उस के कोई किस को पुकारे

हिफ़ाज़त करते हैं हम शहर-ए-दिल की

कहीं सोते कोई शब-ख़ूँ न मारे

समुंदर क्यूँ हुआ तू इतना खारी

कोई रोया था क्या तेरे किनारे

(3144) Peoples Rate This

Your Thoughts and Comments

Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare In Hindi By Famous Poet Farrukh Jafari. Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare is written by Farrukh Jafari. Complete Poem Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare in Hindi by Farrukh Jafari. Download free Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare Poem for Youth in PDF. Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare is a Poem on Inspiration for young students. Share Use Samjha-bujha Ke Hum To Haare with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.