ऐसा नहीं कि मुँह में हमारे ज़बाँ नहीं

ऐसा नहीं कि मुँह में हमारे ज़बाँ नहीं

हैं कम-सुख़न ज़रूर प आजिज़ बयाँ नहीं

हर-चंद जानते हैं उसे हम क़रीब से

पर क्या करें कि पा-ए-सुख़न दरमियाँ नहीं

अच्छा तो एक पल के लिए ही उठा के देख

ऐ आसमाँ जो बार-ए-अमानत-गराँ नहीं

ख़ुद हम में ताब-ए-दीद नहीं है ये और बात

रहता है वो निगाह के आगे कहाँ नहीं

'फ़र्रुख़' कहीं न सुन के करे वो भी अन-सुनी

कहते हैं उस से इस लिए दर्द-ए-निहाँ नहीं

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Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin In Hindi By Famous Poet Farrukh Jafari. Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin is written by Farrukh Jafari. Complete Poem Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin in Hindi by Farrukh Jafari. Download free Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin Poem for Youth in PDF. Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin is a Poem on Inspiration for young students. Share Aisa Nahin Ki Munh Mein Hamare Zaban Nahin with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.