मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

अजीब उलझन सी रहा करती है इन दिनों मुझ को

मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

यूँही देर तक रात रात भर जागती हूँ

तारे गिनती हों यादें जम्अ' करती हूँ

और सुब्ह होने तक सब भूल जाती हूँ

बे-कार सोचें घेरे रहती हैं हमा-वक़्त मुझ को

मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

सूट पसंद करने दुकान पर जाती हूँ

बहुत से कपड़े लेती हूँ मुस्कुराती हूँ

घर आ कर जूँ ही उसे सोचती हूँ

अपने ख़रीदे हुए सूट उदास कर देते हैं मुझ को

मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

खिड़की खोलती हूँ बंद करती हूँ

बारहा सीढ़ियों तक जा के पलटती हूँ

कमरे में बैठती हूँ कभी टहलती हूँ

न जाने कहाँ गया मिलता नहीं अब दिल मुझ को

मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

जी लगता है इस दुनिया से ऊब चुका है

अजीब वहशत है कि हर जगह से अयाँ है

साँस तो चलती है ज़िंदगी ठहरी इक जगह है

ख़ुद-कुशी की ख़्वाहिश बहुत सताती है मुझ को

मेरे आसमान के चाँद को ख़बर दो

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