बदन को वज्द तिरे बे-हिसाब-ओ-हद आए

बदन को वज्द तिरे बे-हिसाब-ओ-हद आए

मिरी रसाई में गर तेरा जज़्र-ओ-मद आए

मैं इक दफ़ा तुझे चूमूँ तो तेरे ख़्वाबों में

किसी भी मर्द का चेहरा न ता-अबद आए

मैं तेग़-ए-इश्क़ से गर तोल दूँ बदन तेरा

तिरी नज़र में न मीज़ान-ए-नेक-ओ-बद आए

जो तेरे ख़्वाब में आ जाए बर्शगाल मिरा

मिरे लिए न तिरे लब पे रद्द-ओ-क़द आए

हर एक साल मनाऊँ मैं जश्न-ए-लम्स उस का

जो दस्तरस में मिरी वो दराज़-क़द आए

बहुत सजेगी ये पोशाक-ए-हर्फ़ ऐ 'काशिफ़'

जो शायरी में मिरी उस के ख़ाल-ओ-ख़द आए

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In Hindi By Famous Poet Syed Kashif Raza. is written by Syed Kashif Raza. Complete Poem in Hindi by Syed Kashif Raza. Download free  Poem for Youth in PDF.  is a Poem on Inspiration for young students. Share  with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.