अहवाल Poetry (page 1)

नाहीद ओ क़मर ने रातों के अहवाल को रौशन कर तो दिया

रात फिर दर्द बनी

ज़ुबैर रिज़वी

अपने अहवाल पे हम आप थे हैराँ बाबा

ज़िया जालंधरी

चला हूँ घर से मैं अहवाल-ए-दिल सुनाने को

ज़ाहिद चौधरी

गुल हैं तो आप अपनी ही ख़ुश्बू में सोचिए

ज़फ़र सहबाई

बे-क़नाअत क़ाफ़िले हिर्स-ओ-हवा ओढ़े हुए

ज़फ़र मुरादाबादी

मेरे अंदर वो मेरे सिवा कौन था

ज़फ़र इक़बाल

चेहरा लाला-रंग हुआ है मौसम-ए-रंज-ओ-मलाल के बाद

ज़फ़र गोरखपुरी

न पढ़ा यार ने अहवाल-ए-शिकस्ता मेरा

वज़ीर अली सबा लखनवी

उन की रफ़्तार से दिल का अजब अहवाल हुआ

वज़ीर अली सबा लखनवी

उस की आवाज़ में थे सारे ख़द-ओ-ख़ाल उस के

वज़ीर आग़ा

जो मरीज़ इश्क़ के हैं उन को शिफ़ा है कि नहीं

वलीउल्लाह मुहिब

आना है तो आ जाओ यक आन मिरा साहब

वलीउल्लाह मुहिब

मैं आशिक़ी में तब सूँ अफ़्साना हो रहा हूँ

वली मोहम्मद वली

हाल-ए-दिल ऐ बुतो ख़ुदा जाने

वाजिद अली शाह अख़्तर

लूटा है मुझे उस की हर अदा ने

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

सारे ज़ख़्मों को ज़बाँ मिल गई ग़म बोलते हैं

तारिक़ क़मर

मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़रती है गुज़र जाने दो

तबस्सुम रिज़वी

इतनी मुद्दत बा'द मिले हो कुछ तो दिल का हाल कहो

सय्यद शकील दस्नवी

यही था वक़्फ़ तिरी महफ़िल-ए-तरब के लिए

सय्यद आबिद अली आबिद

शायरी मज़हर-ए-अहवाल-ए-दरूं है यूँ है

सुलेमान ख़ुमार

और कर लेंगे वो क्या अब हमें रुस्वा कर के

सुलैमान अहमद मानी

सुनो तो ख़ूब है टुक कान धर मेरा सुख़न प्यारे

सिराज औरंगाबादी

रिश्ते में तिरी ज़ुल्फ़ के है जान हमारा

सिराज औरंगाबादी

ग़म की जब सोज़िश सीं महरम होवेगा

सिराज औरंगाबादी

भरा कमाल-ए-वफ़ा सें ख़याल का शीशा

सिराज औरंगाबादी

अर्ज़-ए-अहवाल-ए-दिल-ए-ज़ार करूँ या न करूँ

शऊर बलगिरामी

नहीं सबात बुलंदी-ए-इज्ज़-ओ-शाँ के लिए

ज़ौक़

हाथ सीने पे मिरे रख के किधर देखते हो

ज़ौक़

तर्क-ए-लज़्ज़ात पे माइल जो ब-ज़ाहिर है मिज़ाज

शौक़ बहराइची

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