कारण Poetry (page 18)

ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू

अख़्तर सईद ख़ान

सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है तो ख़त्म क्या होगा

अख़्तर सईद ख़ान

दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल और आप से पर्दा भी क्या

अख़्तर सईद ख़ान

माइल-ए-लुत्फ़ है आमादा-ए-बे-दाद भी है

अख़तर मुस्लिमी

हर वक़्त नौहा-ख़्वाँ सी रहती हैं मेरी आँखें

अख़्तर अंसारी

वहम ही होगा मगर रोज़ कहाँ होता है

अखिलेश तिवारी

बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा

अकबर हैदराबादी

नाम 'अकबर' तो मिरा माँ की दुआ ने रक्खा

अकबर हमीदी

इश्क़-ए-बुत में कुफ़्र का मुझ को अदब करना पड़ा

अकबर इलाहाबादी

ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल'

अजमल सिराज

पेश जो आया सर-ए-साहिल शब बतलाया

अजमल सिराज

जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब

अजमल सिराज

दिल हैं यूँ मुज़्तरिब मकानों में

ऐतबार साजिद

मुलाक़ातें नहीं फिर भी मुलाक़ातें

ऐन ताबिश

घनी सियह ज़ुल्फ़ बदलियों सी बिला सबब मुझ में जागती है

ऐन ताबिश

लम्हा लम्हा रोज़ ओ शब को देर होती जाएगी

अहमद शनास

क़ानून-ए-क़ुदरत

अहमद नदीम क़ासमी

जब भी आँखों में तिरी रुख़्सत का मंज़र आ गया

अहमद नदीम क़ासमी

हम दिन के पयामी हैं मगर कुश्ता-ए-शब हैं

अहमद नदीम क़ासमी

इक फूल मेरे पास था इक शम्अ' मेरे साथ थी

अहमद मुश्ताक़

धड़कती रहती है दिल में तलब कोई न कोई

अहमद मुश्ताक़

अजब नहीं कभी नग़्मा बने फ़ुग़ाँ मेरी

अहमद मुश्ताक़

छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ

अहमद महफ़ूज़

काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ मुझे मार दीजिए

अहमद फ़रहाद

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम

अहमद फ़राज़

दोस्ती का हाथ

अहमद फ़राज़

रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं

अहमद फ़राज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

अहमद फ़राज़

ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते

अहमद फ़राज़

दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें

अहमद फ़राज़

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