बहार आई जुनूँ लेगा हमारा इम्तिहाँ देखें

बहार आई जुनूँ लेगा हमारा इम्तिहाँ देखें

नमक देगा दिल-ए-ज़ख़्मी को शोर-ए-बुलबुलाँ देखें

सिया है ज़ख़्म-ए-बुलबुल गुल ने ख़ार और बू-ए-गुलशन से

सूई तागा हमारे चाक-ए-दिल का है कहाँ देखें

हमें दिल-सोज़ी हमेशा यहाँ तक दीन ओ ईमाँ है

कि जी जलता है जब हम बुलबुल-ए-फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ देखें

गुज़र जाती है दिल से तीर हो कर याद उस क़द की

जहाँ हम-दोश-ए-आशिक़ हम कोई अबरू-कमाँ देखें

हुमा से बच के मुझ मजनूँ को दौलत इश्क़ की हो जो

सग-ए-लैला की क़िस्मत होंगे मेरे उस्तुख़ाँ देखें

चला हूँ 'उज़लत' अब सहरा बगूले की ज़ियारत को

मिलेगा तौफ़ को मजनूँ का बर्बाद आस्ताँ देखें

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In Hindi By Famous Poet Wali Uzlat. is written by Wali Uzlat. Complete Poem in Hindi by Wali Uzlat. Download free  Poem for Youth in PDF.  is a Poem on Inspiration for young students. Share  with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.