महशरिस्तान-ए-जुनूँ में दिल-ए-नाकाम आया

महशरिस्तान-ए-जुनूँ में दिल-ए-नाकाम आया

नाला हंगामा-नवाज़ी पे सर-ए-शाम आया

मेहर अज़-रू-ए-मुअल्ला जो लब-ए-बाम आया

देखिए देखिए अब धूप गई घाम आया

बर्क़ की शो'ला-नवाज़ी सबब-ए-तूल-ए-हयात

फ़ितरत-ए-मौत तिरी ज़ीस्त का हंगाम आया

मुंतशिर हो गए जिस वक़्त सब अज्ज़ा-ए-हयात

क़तरा दरिया में ब-अंदाज़ा-ए-अंजाम आया

तौसन-ए-उम्र-ए-गुरेज़ाँ की सुबुक-रफ़्तारी

काम देती नहीं जब मौत का पैग़ाम आया

मर्कज़-ए-रूह ये है कश्मकश-ए-मौत-ओ-हयात

फिर भी वारफ़्तगी-ए-शौक़ पे इल्ज़ाम आया

मैं वो आसूदा-ए-सोज़-ए-ख़लिश-ए-मिज़्गाँ हूँ

जिस को राह-ए-तलब-ए-शौक़ में आराम आया

तूर से इक कशिश-मश्क़ थी सूरत-गर-ए-शौक़

तुझ पर ऐ वादी-ए-ऐमन अबस इल्ज़ाम आया

सर्द-मेहरी से किसी को जो हुई हाजत-ए-ग़ुस्ल

गर्म-जोशी को बग़ल में लिए हम्माम आया

ज़ुल्फ़ के जाल में मा'शूक़ का सर है ख़ुद भी

क़ैदियों मुज़्दा कि सय्याद तह-ए-दाम आया

क़ब्र से रास्ता सीधा है ख़ुदा के घर का

जो उधर जाने लगा बाँध के एहराम आया

है अगर नाम इसी का अदबियात-ए-लतीफ़

तो ज़रीफ़' इस को कहें क्या जिसे ये काम आया

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