मुराद-ए-शिकवा नहीं लुत्फ़-ए-गुफ़्तुगू के सिवा

मुराद-ए-शिकवा नहीं लुत्फ़-ए-गुफ़्तुगू के सिवा

बचा है पैरहन जाँ में क्या रफ़ू के सिवा

हवा चली थी हर इक सम्त उस को पाने की

न कुछ भी हाथ लगा गर्द-ए-जुस्तुजू के सिवा

किसी की याद मुझे बार बार क्यूँ आई

उस एक फूल में क्या शय थी रंग-ओ-बू के सिवा

उभरता रहता है इस ख़ाक-ए-दिल पे नक़्श कोई

अब इस नवाह में कुछ भी नहीं नुमू के सिवा

अधूरी छोड़ के तस्वीर मर गया वो 'ज़ेब'

कोई भी रंग मयस्सर न था लहू के सिवा

(563) Peoples Rate This

Your Thoughts and Comments

Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa In Hindi By Famous Poet Zeb Ghauri. Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa is written by Zeb Ghauri. Complete Poem Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa in Hindi by Zeb Ghauri. Download free Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa Poem for Youth in PDF. Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa is a Poem on Inspiration for young students. Share Murad-e-shikwa Nahin Lutf-e-guftugu Ke Siwa with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.