मेरी आँखों में आँसू प्यारे
मेरी आँखों में आँसू प्यारे
घर तुम्हारा है तुम रहो प्यारे
ग़ैर की बात में न तुम आना
मैं कहूँ और तुम सुनो प्यारे
लुत्फ़-ए-सोहबत मता-ए-उल्फ़त है
कुछ कहो और कुछ सुनो प्यारे
इक फ़रेब-ए-नज़र है कुछ भी नहीं
ये गुलिस्तान-ए-रंग-ओ-बू प्यारे
कौन कितना वफ़ा का है पाबंद
फ़ैसला होगा मू-ब-मू प्यारे
है तमन्ना तुम्हारी सब को मगर
तुम हो आप अपनी आरज़ू प्यारे
इक मोहब्बत है वो शिकायत भी
जो करे कोई रू-ब-रू प्यारे
हम न छोड़ेंगे शेवा-ए-तस्लीम
तुम जो चाहो वो तुम करो प्यारे
नाम-लेवा तुम्हारा है 'तरज़ी'
आदमी की तरह मिलो प्यारे
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अब्दुल मन्नान तरज़ी