जुनूँ में दामन-ए-दिल गरचे तार तार हुआ

जुनूँ में दामन-ए-दिल गरचे तार तार हुआ

मगर ये जश्न सर-ए-कूचा-ए-बहार हुआ

हर एक सज्दे में दिल को तिरा ख़याल आया

ये इक गुनाह इबादत में बार बार हुआ

समेट ली हैं मोहब्बत ने सारी परवाज़ें

दिल-ओ-दिमाग़ में कैसा ये इंतिशार हुआ

नहीं बुझाया हवाओं ने पहली बार चराग़

ये सानेहा तो मिरे साथ बार बार हुआ

किसी के वास्ते तस्वीर-ए-इंतिज़ार थे हम

वो आ गया प कहाँ ख़त्म इंतिज़ार हुआ

अँधेरी शब के मुक़द्दर में इक सवेरा था

ये राज़ मुझ पे दम-ए-सुब्ह आश्कार हुआ

जो तुझ में डूब के देखा तो पा लिया ख़ुद को

'अलीना' यूँ मिरा फिर मुझ पे इख़्तियार हुआ

(883) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554