तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

इस आग में हमारी तरह जल के देख ले

दश्त-ए-तलब में प्यार के ग़ुंचे भी खिल उठें

कुछ रोज़ मेरे साथ कभी चल के देख ले

मुमकिन है कोई सुब्ह-ए-तमन्ना हो इस के ब'अद

ऐ हसरतों की रात ज़रा ढल के देख ले

कुछ गर्द-बाद ग़म के उमीदों के कुछ सराब

मंज़र हमारे दिल में कोई थल के देख ले

रखते हैं हम भी जुरअत-ए-इज़हार-ए-ज़िंदगी

महरूमियों का ख़ौफ़ अगर टल के देख ले

इस दिल में हो चुका है बहुत वलवलों का ख़ून

ऐ जज़्ब-ए-शौक़ तू भी यहाँ पल के देख ले

'अज़हर' तिरा नसीब है ये शबनमी बहार

चेहरे पे तू भी रंग-ए-ख़िज़ाँ मल के देख ले

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