यौम-ए-जम्हूर

यौम-ए-जम्हूर तेरे आने पर

नाच उठे हैं मसर्रतों के पयाम

इन उजालों में ज़ुल्मतें तो नहीं

सोचते हैं मिरे वतन के अवाम

जगमगाता है वक़्त का चेहरा

बे-बसों पर जहान हँसता है

अपने रुख़ पर नहीं है मौजा-ए-नूर

झोंपड़ी किस तरह हो रश्क-ए-महल

जाम-ए-जम्हूरियत तो पीते हैं

हसरतें दम जो तोड़ दें घुट कर

लेकिन इस में नहीं है कैफ़-ओ-सुरूर

ज़िंदगी क्यूँ न हो शिकार-ए-अजल

अपने हसरत-भरे मुक़द्दर का

इस तरह हम मज़ाक़ उड़ाते हैं

ख़ुद ही रोते हैं वक़्त का रोना

और फिर ख़ुद ही मुस्कुराते हैं

(1022) Peoples Rate This

Your Thoughts and Comments

Yaum-e-jamhur In Hindi By Famous Poet Charkh Chinioti. Yaum-e-jamhur is written by Charkh Chinioti. Complete Poem Yaum-e-jamhur in Hindi by Charkh Chinioti. Download free Yaum-e-jamhur Poem for Youth in PDF. Yaum-e-jamhur is a Poem on Inspiration for young students. Share Yaum-e-jamhur with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.