जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा

जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा

ब-इज्ज़-ए-शौक़ ब-हाल-ए-ख़राब निकलेगा

जो रंग बाँट के जाता है तिनके तिनके को

अदू ज़मीं का यही आफ़्ताब निकलेगा

भरी हुई है कई दिन से धुँद गलियों में

न जाने शहर से कब ये अज़ाब निकलेगा

जो दे रहे हो ज़मीं को वही ज़मीं देगी

बबूल बोए तो कैसे गुलाब निकलेगा

अभी तो सुब्ह हुई है शब-ए-तमन्ना की

बहेंगे अश्क तो आँखों से ख़्वाब निकलेगा

मिरे गुनाह बहुत हैं मगर तक़ाबुल में

उसी का लुत्फ़-ओ-करम बे-हिसाब निकलेगा

मिला किसी को न 'दानिश' कुछ आरज़ू के ख़िलाफ़

पस-ए-फ़ना भी यही इंतिख़ाब निकलेगा

(938) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554