हर एक रास्ते का हम-सफ़र रहा हूँ मैं

हर एक रास्ते का हम-सफ़र रहा हूँ मैं

तमाम उम्र ही आशुफ़्ता-सर रहा हूँ मैं

क़दम क़दम पे वहाँ क़ुर्बतें थीं और यहाँ

हुजूम-ए-शहर से तन्हा गुज़र रहा हूँ मैं

पुकारा जब मुझे तन्हाई ने तो याद आया

कि अपने साथ बहुत मुख़्तसर रहा हूँ मैं

ये कैसी रिफ़अतें आईना-ए-निगाह में हैं

किसी सितारे पे जैसे उतर रहा हूँ मैं

मैं रौशनी ही की वहदानियत का क़ाइल हूँ

मोहब्बतों ही का पैग़ाम-बर रहा हूँ मैं

मैं शब-परस्त नहीं हूँ यही ख़ता है मिरी

अदा-शनास-ए-जमाल-ए-सहर रहा हूँ मैं

यहाँ बस एक नया तजरबा हुआ 'फ़ारिग़'

कि लम्हे लम्हे को महसूस कर रहा हूँ मैं

(947) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554