घटेगा तेरे कूचे में वक़ार आहिस्ता आहिस्ता

घटेगा तेरे कूचे में वक़ार आहिस्ता आहिस्ता

बढ़ेगा आशिक़ी का ए'तिबार आहिस्ता आहिस्ता

बहुत नादिम हुए आख़िर वो मेरे क़त्ल-ए-नाहक़ पर

हुई क़द्र-ए-वफ़ा जब आश्कार आहिस्ता आहिस्ता

जिला-ए-शौक़ से आईना-ए-तस्वीर-ए-ख़ातिर में

नुमायाँ हो चला रू-ए-निगार आहिस्ता आहिस्ता

मोहब्बत की जो फैली है ये निकहत बाग़-ए-आलम में

हुई है मुंतशिर ख़ुशबू-ए-यार आहिस्ता आहिस्ता

दिल ओ जान ओ जिगर सब्र ओ ख़िरद जो कुछ है पास अपने

ये सब कर देंगे हम उन पर निसार आहिस्ता आहिस्ता

अजब कुछ हाल हो जाता है अपना बे-क़रारी से

बजाते हैं कभी जब वो सितार आहिस्ता आहिस्ता

असर कुछ कुछ रहेगा वस्ल में भी रंज-ए-फ़ुर्क़त का

दिल-ए-मुज़्तर को आएगा क़रार आहिस्ता आहिस्ता

न आएँगे वो 'हसरत' इंतिज़ार-ए-शौक़ में यूँही

गुज़र जाएँगे अय्याम-ए-बहार आहिस्ता आहिस्ता

(935) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554