न सही गर उन्हें ख़याल नहीं
न सही गर उन्हें ख़याल नहीं
कि हमारा भी अब वो हाल नहीं
याद उन्हें वादा-ए-विसाल नहीं
कब किया था यही ख़याल नहीं
ऐसे बिगड़े वो सुन के शौक़ की बात
आज तक हम से बोल-चाल नहीं
मुझ को अब ग़म ये है कि बाद मिरे
ख़ातिर-ए-यार बे-मलाल नहीं
अफ़्व-ए-हक़ का है मय-कशों पे नुज़ूल
रेज़़िश-ए-अब्र-ए-बरशगाल नहीं
हम पे क्यूँ अर्ज़-ए-हाल-ए-दिल पे इताब
एलची को कहीं ज़वाल नहीं
सुन के मुझ से वो ख़्वाहिश-ए-पाबोस
हँस के कहने लगे मजाल नहीं
दिल को है याद शौक़ का वो हुनर
जिस से बढ़ कर कोई कमाल नहीं
आप नादिम न हों कि 'हसरत' से
शिकवा-ए-ग़म का एहतिमाल नहीं
(934) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
हसरत मोहानी