बाज़ी जिन के हाथ रही
जितनी देर में तुम एक आहट से उतरते हो
और सवेर से अपनी पलकें इकट्ठी करते हो
उतनी देर में एक नज़्म बन चुकी होती है
नज़्म जिस की आँखों से लोबान की ख़ुशबू और पलकों
से नम टपकता हो
और वो अपनी पहचान के लिए ख़ुद अपना वसीला बने
लेकिन अगर इस के ब'अद के वसीले ज़्यादा मो'तबर ठहरें
तो हैरतें अफ़सोस और पछतावे रद्द-ए-दुआ
जब मोहब्बतें इंसान से कम-तर हवालों की मुहताज हो जाएँ
तो वो सीढ़ियाँ उतर जाती हैं आसमान नहीं रहतीं
ज़मीन का हवाला मोहब्बत है
और वो जानवर ज़्यादा अच्छी तरह निभा सकते हैं
बहुत क़दीम से किया कव्वों ने नहीं बताया कि अपना जुर्म
और अपनी आख़िरत को मिट्टी से पर्दा-पोश करो
और क्या कुत्ते ए'तिबार की आख़िरी हद नहीं हैं
जो कहते हैं मेरे महबूब सो जा! मैं हूँ ना
मैं हूँ ना!
ज़लज़लों की ख़बर देने के लिए
मैं तेरी मुसीबत-ज़दा नस्ल को कहीं से भी ढूँड लाऊँगा
अगर तेरी मोहब्बत की निशानियाँ उन के हाथों की उँगलियों में न भी मिलें
वो तुझे ज़रूर मिल जाएँगे
उन के हाथ और बाज़ू तेरे भाई-बंदों ने काट लिए
लेकिन मैं अपने मुँह का निवाला उन्हें दे कर ही लौटूँगा
मैं मुसीबत के सब दिनों में तेरे साथ हूँ
मैं सग-ए-दर हूँ मिरी तुझ से सगाई है!
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नसरीन अंजुम भट्टी