निपटेंगे दिल से मार्का-ए-रह-गुज़र के ब'अद

निपटेंगे दिल से मार्का-ए-रह-गुज़र के ब'अद

लेंगे सफ़र का जाएज़ा ख़त्म-ए-सफ़र के ब'अद

उठने को इन की बज़्म में सब की नज़र उठी

इतना मगर कहूँगा कि मेरी नज़र के ब'अद

सब ज़ोर हो रहा है मिरी सर-कशी पे सर्फ़

क्या होगा हाल-ए-दार-ओ-रसन मेरे सर के ब'अद

कू-ए-सितम से गुज़रें तो शोरीदगान-ए-इश्क़

हँसने लगेंगे ज़ख़्म-ए-जिगर ज़ख़्म-ए-सर के ब'अद

बर्क़-ए-सितम को नज़्र करूँ भी तो क्या करूँ

अब क्या रहा है आग लगाने को घर के ब'अद

बे-ख़्वाब कर रहे हैं शब-ए-ग़म के मरहले

आँखें झपक न जाएँ तुलू-ए-सहर के ब'अद

होगा तवील और भी अफ़साना-ए-वफ़ा

अहल-ए-जफ़ा के तन्तना-ए-मुख़्तसर के ब'अद

(368) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554