आरती हम क्या उतारें हुस्न-ए-माला-माल की

आरती हम क्या उतारें हुस्न-ए-माला-माल की

बुझ गई हर जोत पूजा के सुनहरे थाल की

तुम तो क्या दस्तक नहीं देतीं हवाएँ तक यहाँ

दिल है या सुनसान कुटिया है किसी कंगाल की

देख ऐ गुल-पैरहन तेरे लिए परदेस से

कौन लाया है हवाओं की मोअ'त्तर पालकी

फिर उगाने दो यहाँ हम को लहू के कुछ गुलाब

आप ने तो शाहराह-ए-दिल बहुत पामाल की

तू मुक़द्दस आँख है या'नी हसीं सूरज की आँख

और मैं गहरी गुफा वो भी किसी पाताल की

तुम पिलाओ अपने होंटों से अगर आब-ए-हयात

फेंक देंगे हम सुराही आतिशीं सय्याल की

गुनगुना कर तैरता है जिस में ख़ुश्बू का बदन

'प्रेम' तेरी शाइ'री वो झील है सुर-ताल की

(415) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554