ये शहर शहर-ए-बला भी है कीना-साज़ के साथ

ये शहर शहर-ए-बला भी है कीना-साज़ के साथ

निकल चलो किसी महबूब-ए-दिल-नवाज़ के साथ

यही नवा-ए-अदम है यही नवाज़िश-ए-कुन

ख़ुशा हिकायत-ए-नै हर्फ़-ए-नै-नवाज़ के साथ

सू-ए-निगार-ओ-सू-ए-शहर-ए-ज़र-निगार चलें

क़लंदरान-ए-हवसनाक-ओ-पाक-बाज़ के साथ

सलाम हम-नफ़सो अल-फ़िराक़ हम-सफ़रो

सफ़र है दूर का वो भी रह-ए-दराज़ के साथ

ये ख़िर्क़ा-पोश फ़क़ीरान-ए-ख़ारिक़-उल-आदात

हमारे क़ाफ़िला-हा-ए-नियाज़-ओ-नाज़ के साथ

ये जंगलों की मसाफ़त ये नग़मा-ए-दफ़-ओ-चंग

ये वादियों में इक़ामत सुरूद-ओ-साज़ के साथ

वो वज्द-ओ-हाल का आलम वो रक़्स-ए-दरवेशाँ

शहान-ए-नाज़-ओ-गदायान-ए-बे-नियाज़ के साथ

ख़ुशा वो बांग-ए-अज़ाँ वो तराना-ए-नाक़ूस

वो बंदगी-ए-सनम बंदा-ए-नमाज़ के साथ

हर इक फ़क़ीर के लब पर ये नारा-ए-मस्तान

चले चलो अदब-ओ-इज़्ज़-ओ-इमतियाज़ के साथ

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