है निहायत सख़्त शान-ए-इम्तिहान-ए-कू-ए-दोस्त

है निहायत सख़्त शान-ए-इम्तिहान-ए-कू-ए-दोस्त

ज़िंदगी से हाथ धो लें साकिनान-ए-कू-ए-दोस्त

जब नहीं पाते पता ना-वाक़िफ़ान-ए-कू-ए-दोस्त

दर्द उठ उठ के बताता है निशान-ए-कू-ए-दोस्त

तंग करते हैं हमें क्यूँ पासबान-ए-कू-ए-दोस्त

और हैं दो-चार दिन हम मेहमान-ए-कू-ए-दोस्त

ना-तवाँ ये और मंज़िल इश्क़ की दुश्वार-तर

चलते चलते थक न जाएँ राह-रवान-ए-कू-ए-दोस्त

आरज़ू-ए-वस्ल है अब और न फ़ुर्क़त का अलम

शुक्र है आराम से हैं ख़ुफ़्तगान-ए-कू-ए-दोस्त

कौन सी जा है असीरान-ए-मोहब्बत के लिए

किस लिए जाएँ कहीं वाबस्तगान-ए-कू-ए-दोस्त

ऐ 'रशीद' उल्फ़त में जज़्ब-ए-दिल सलामत चाहिए

ढूँड ही लेंगे किसी सूरत निशान-ए-कू-ए-दोस्त

(459) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554