इश्क़ की मेरे जो शोहरत हो गई
इश्क़ की मेरे जो शोहरत हो गई
यार से मुझ को नदामत हो गई
ख़ाक अर्ज़-ए-मुद्दआ उस से करूँ
जिस को बातों में कुदूरत हो गई
याँ से जाने को हैं वो आचुक कहीं
क्या बला ऐ अब्र-ए-रहमत हो गई
अब सितम अग़्यार पर करने लगे
मेरे मर जाने से इबरत हो गई
जल्वा-ए-मअ'नी नज़र आने लगा
पीते पीते मय ये सूरत हो गई
उन की बातें उस ने भी छुप कर सुनीं
आज नासेह को नसीहत हो गई
मन्अ-ए-वस्ल-ए-ग़ैर पर हँस कर कहा
बारे अब तुम को भी ग़ैरत हो गई
बू-ए-गुल उस गुल की बू के रू-ब-रू
फ़िल-हक़ीक़त बे-हक़ीक़त हो गई
बस न फ़रमाते फिरो ये 'शेफ़्ता'
गो उन्हें तुम से मोहब्बत हो गई
(742) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554