लाख नादाँ हैं मगर इतनी सज़ा भी न मिले
लाख नादाँ हैं मगर इतनी सज़ा भी न मिले
चारासाज़ों को मिरी शाम-ए-बला भी न मिले
हसरत-आगीं तो है नाकामी-ए-मंज़िल लेकिन
लुत्फ़ तो जब है कि ख़ुद अपना पता भी न मिले
कुछ निगाहों से ग़म-ए-दिल की ख़बर मिलती है
वर्ना हम वो हैं कि बातों से हवा भी न मिले
ख़्वाहिश-ए-दाद-रसी क्या हो सितम-गर से जहाँ
आँख में शाइबा-ए-उज़्र-ए-जफ़ा भी न मिले
इस क़दर क़हत-ए-बसीरत भी नहीं ऐ वाइ'ज़
हम बुतों के लिए निकलें तो ख़ुदा भी न मिले
इश्क़ वो अर्सा-ए-पुर-ख़ार है हमदम कि जहाँ
ज़िंदगी रास न आए तो क़ज़ा भी न मिले
क्या क़यामत है तबीअ'त की रवानी 'वारिस'
कोई ढूँढे तो निशान-ए-कफ़-ए-पा भी न मिले
(628) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
वारिस किरमानी