यूँ तुझ से दूर दूर रहूँ ये सज़ा न दे
यूँ तुझ से दूर दूर रहूँ ये सज़ा न दे
अब और ज़िंदा रहने की मुझ को दुआ न दे
अब एहतियात-ए-शिद्दत-ए-गिर्या न पूछिए
डरता हूँ मैं वो सुन के कहीं मुस्कुरा न दे
लो मैं ने दिल की उस से लगाई तो है मगर
डर है ये शम-ए-ग़म कहीं दामन जला न दे
कहना तो है मुझे भी हदीस-ए-ग़म-ए-हयात
लब खोलने की काश इजाज़त ज़माना दे
हो बिजलियों का मुझ से जहाँ पर मुक़ाबला
या-रब वहीं चमन में मुझे आशियाना दे
उस देने वाले के यहाँ किस शय की है कमी
तुम माँगने की तरह जो माँगो तो क्या न दे
हस्सास मैं बहुत हूँ न लग जाए दिल को ठेस
महफ़िल में मुस्कुरा के मुझे यूँ सदा न दे
मैं आश्ना-ए-दर्द-ओ-ग़म-ए-दिल हूँ चारा-गर
जिस से इफ़ाक़ा हो मुझे ऐसी दवा न दे
'आजिज़' तमाम उम्र मैं खाता रहा फ़रेब
मुझ को मिरी वफ़ाओं का ऐसा सिला न दे
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आजिज़ मातवी