असर करे न करे सुन तो ले मिरी फ़रियाद

असर करे न करे सुन तो ले मिरी फ़रियाद

नहीं है दाद का तालिब ये बंदा-ए-आज़ाद

ये मुश्त-ए-ख़ाक ये सरसर ये वुसअत-ए-अफ़्लाक

करम है या कि सितम तेरी लज़्ज़त-ए-ईजाद

ठहर सका न हवा-ए-चमन में ख़ेमा-ए-गुल

यही है फ़स्ल-ए-बहारी यही है बाद-ए-मुराद

क़ुसूर-वार ग़रीब-उद-दयार हूँ लेकिन

तिरा ख़राबा फ़रिश्ते न कर सके आबाद

मिरी जफ़ा-तलबी को दुआएँ देता है

वो दश्त-ए-सादा वो तेरा जहान-ए-बे-बुनियाद

ख़तर-पसंद तबीअत को साज़गार नहीं

वो गुलसिताँ कि जहाँ घात में न हो सय्याद

मक़ाम-ए-शौक़ तिरे क़ुदसियों के बस का नहीं

उन्हीं का काम है ये जिन के हौसले हैं ज़ियाद

(3169) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554