न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है
न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है
जो बात मर्द-ए-क़लंदर की बारगाह में है
सनम-कदा है जहाँ और मर्द-ए-हक़ है ख़लील
ये नुक्ता वो है कि पोशीदा ला-इलाह में है
वही जहाँ है तिरा जिस को तू करे पैदा
ये संग-ओ-ख़िश्त नहीं जो तिरी निगाह में है
मह ओ सितारा से आगे मक़ाम है जिस का
वो मुश्त-ए-ख़ाक अभी आवारगान-ए-राह में है
ख़बर मिली है ख़ुदायान-ए-बहर-ओ-बर से मुझे
फ़रंग रहगुज़र-ए-सैल-ए-बे-पनाह में है
तलाश उस की फ़ज़ाओं में कर नसीब अपना
जहान-ए-ताज़ा मिरी आह-ए-सुब्ह-गाह में है
मिरे कदू को ग़नीमत समझ कि बादा-ए-नाब
न मदरसे में है बाक़ी न ख़ानक़ाह में है
(4652) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
अल्लामा इक़बाल