इश्क़-ए-बुताँ का ले के सहारा कभी कभी
इश्क़-ए-बुताँ का ले के सहारा कभी कभी
अपने ख़ुदा को हम ने पुकारा कभी कभी
आसूदा-ए-ख़ातिर ही नहीं मत्मह-ए-वफ़ा
ग़म भी किया है हम ने गवारा कभी कभी
इस इंतिहा-ए-तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
हम ने लिया है नाम तुम्हारा कभी कभी
तूफ़ाँ का ख़ौफ़ है अभी शायद करिश्मा-कार
आता है सामने जो किनारा कभी कभी
तन्हा-रवी ने रक्खी हमारे जुनूँ की लाज
गो अहल-ए-कारवाँ ने पुकारा कभी कभी
अब क्या कहें दिल-ए-मुतलव्विन-मिज़ाज को
अक्सर ये आप का है हमारा कभी कभी
पैहम सितम से इश्क़ की तस्कीन हो न जाए
ऐ दोस्त इल्तिफ़ात ख़ुदा-रा कभी कभी
फ़रियाद-ए-ग़म से 'अर्श' सँभलता है दिल मगर
लेते हैं अहल-ए-दिल ये सहारा कभी कभी
(949) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
अर्श मलसियानी