चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे
चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे
उतार दे चाँद उस के दर पर सियाह दिन मेरे घर में रख दे
कहीं कहीं कोई रब्त-ए-मख़्फ़ी इबारत-ए-मुन्तशर में रख दे
गुरेज़ पर हैं निशान सारे तरफ़ भी कोई सफ़र में रख दे
तलब तलब आइना-सिफ़त है ख़राब-ओ-ख़स्ता हैं अक्स सारे
ये नेकियाँ भी हैं सर-बरहना लताफ़त-ए-ख़ैर शर में रख दे
नशात-आवर है ये उदासी का एक उड़ता हुआ सा लम्हा
मबादा ताक़-ए-रजा हो वीराँ शरारा इक चश्म-ए-तर में रख दे
ये सर्फ़-ओ-हासिल-गज़ीदा दुनिया न दिन ही मेरे न मेरी रातें
कहाँ तलक देखता ही जाऊँ समाअतें कुछ नज़र में रख दे
मिरे ख़ुदा मेरे जिस्म-ओ-जाँ के ख़ुदा मिरे हाथ झड़ न जाएँ
दुआ तह-ए-संग-ए-लब गड़ी है असर ज़रा सा असर में रख दे
बदन है या क़िला-ए-हवा है कहीं से आऊँ कहीं से जाऊँ
हज़ारों रख़्ने पड़े हुए हैं उठा के दीवार दर में रख दे
(718) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
अतीक़ुल्लाह