किसी के नक़्श-ए-क़दम का निशाँ नहीं मिलता

किसी के नक़्श-ए-क़दम का निशाँ नहीं मिलता

वो रहगुज़र हूँ जिसे कारवाँ नहीं मिलता

क़दम क़दम पे तिरी राह में फ़लक हाइल

मुझे तलाश से भी आसमाँ नहीं मिलता

उन्हें तरीक़ा-ए-लुत्फ़-ओ-करम नहीं मालूम

हमें सलीक़ा-ए-आह-ओ-फ़ुगाँ नहीं मिलता

उरूस-ए-दहर को ग़ाज़ा भी चाहिए लेकिन

ग़ुबार-ए-जादा-ए-अम्न-ओ-अमाँ नहीं मिलता

तुझे ये ग़म कि ख़ुशी को तिरी सबात नहीं

मुझे गिला कि ग़म-ए-जावेदाँ नहीं मिलता

धड़क रहा है हर अहल-ए-वफ़ा के सीने में

हमारा दर्द भरा दिल कहाँ नहीं मिलता

सभी को दा'वा-ए-महर-ओ-वफ़ा है दुनिया में

जो मेहरबाँ न हो वो मेहरबाँ नहीं मिलता

ग़म-ए-हयात के पुर-हौल क़हक़हों के सिवा

कहीं से अपना जवाब-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मिलता

दिल-ए-शिकस्ता को ले जाइए कहाँ 'बासित'

दिमाग़-ए-नख़वत-ए-शीशा-गराँ नहीं मिलता

(1225) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554