मोहब्बत में आराम सब चाहते हैं

मोहब्बत में आराम सब चाहते हैं

मगर हज़रत-ए-'दाग़' कब चाहते हैं

ख़ता क्या है उन की जो उस बुत को चाहा

ख़ुदा चाहता है तो सब चाहते हैं

वही उन का मतलूब ओ महबूब ठहरा

बजा है जो उस की तलब चाहते हैं

मगर आलम-ए-यास में तंग आ कर

ये सामान-ए-आफ़त अजब चाहते हैं

अजल की दुआ हर घड़ी माँगते हैं

ग़म-ओ-दर्द-ओ-रंज-ओ-तअब चाहते हैं

न तफ़रीह-ए-आसाइश-ए-दिल की ख़्वाहिश

न सामान-ए-ऐश-ओ-तरब चाहते हैं

क़यामत बपा हो नुज़ूल-ए-बला हो

यही आज-कल रोज़ ओ शब चाहते हैं

न माशूक़-ए-फ़रख़ार से उन को मतलब

न ये जाम-ए-बिन्तुल-इनब चाहते हैं

न जन्नत की हसरत न हूरों की पर्वा

न कोई ख़ुशी का सबब चाहते हैं

निराली तमन्ना है अहल-ए-करम से

सितम चाहते हैं ग़ज़ब चाहते हैं

न हो कोई आगाह राज़-ए-निहाँ से

ख़मोशी को ये मोहर-ए-लब चाहते हैं

ख़ुदा उन की चाहत से महफ़ूज़ रक्खे

ये आज़ार भी मुंतख़ब चाहते हैं

ग़म-ए-इश्क़ में 'दाग़' मजबूर हो कर

कभी जो न चाहा वो अब चाहते हैं

(1354) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554