अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
चश्म-ए-बद-दूर दुल्हन बन के शबाब आता है
हिज्र में भी मुझे इम्दाद-ए-अजल है दरकार
मेरी तुर्बत पे न आ तुझ से हिजाब आता है
दीद आख़िर है उलट दीजिए चेहरे से नक़ाब
आज मुश्ताक़ के चेहरे पे नक़ाब आता है
किस तरफ़ जोश-ए-करम तेरी निगाहें उट्ठीं
कौन महशर में सज़ा-वार-ए-इताब आता है
मौत की नींद भी अब चैन से सोना मालूम
कि जनाज़े पे वो ग़ारत-गर-ए-ख़्वाब आता है
दिल को इस तरह ठहर जाने की आदत तो न थी
क्यूँ अजल क्या मिरे नामे का जवाब आता है
जल्वा-ए-रंग है नैरंग-ए-तक़ाज़ा-ए-निगाह
कोई मजबूर तमाशा-ए-सराब आता है
हो गया ख़ून तिरे हिज्र में दिल का शायद
अब तसव्वुर भी तिरा नक़्श-बर-आब आता है
मिलती जुलती है मिरी उम्र-ए-दो-रोज़ा 'फ़ानी'
जी भर आता है अगर ज़िक्र-ए-हबाब आता है
(870) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
फ़ानी बदायुनी