मुझे खोल ताज़ा हवा में रख

ये जो फ़स्ल-ए-फ़ुर्क़त-ए-अस्र है

इसे काट भी

ये जो दफ़्तर-ए-ग़म-ए-ज़ीस्त है

इसे बंद कर

इसे बंद कर कि वो बुत-फ़रोश नहीं रहे

जो असीर थे रुख़-ए-दहर के

तिरे रू-ब-रू तिरे चार सू

शब हस्त-ओ-बूद की राह में तिरे हम-क़दम

तिरे आइनों की शिकस्तगी का भरम लिए

कोई और कब है मिरे सिवा

कोई और कब था मिरे बग़ैर

मगर ऐ रहीन-ए-दम-ए-अलस्त

मिरे वाक़िए के मुक़द्दमात से पेशतर

मेरी बंदगी को फ़रोग़ दे

कभी दोपहर के ख़ुमार में

किसी अक्स-ए-मौज-ए-बला में रख

मिरे ख़ाक-ओ-ख़ूँ को निहाल कर

मुझे खोल ताज़ा हवा में रख

(894) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554