क्या क्या हैं गिले उस को बता क्यूँ नहीं देता

क्या क्या हैं गिले उस को बता क्यूँ नहीं देता

ताज़ीर-ए-ख़ता मुझ को सुना क्यूँ नहीं देता

हैं नावक-ए-दिल-दोज़ मिरे यार के तेवर

इक बार वो सब तीर चला क्यूँ नहीं देता

यक-तरफ़ा मोहब्बत के तज़ब्ज़ुब से तो निकलूँ

इस राज़ से पर्दा वो हटा क्यूँ नहीं देता

लिखता भी है मुझ को सर-ए-क़िरतास-ए-मोहब्बत

मज़्मूम जो लगता हूँ मिटा क्यूँ नहीं देता

इतना ही फ़सुर्दा है अगर हाल पे मेरे

जल्वा कभी अपना वो दिखा क्यूँ नहीं देता

सर-गर्म-ए-सफ़र हूँ मैं तिरे दश्त में कब से

मुझ को मिरी मंज़िल का पता क्यूँ नहीं देता

ख़्वाबीदा-नसीबी भी तो तेरी ही अता है

सोई मिरी तक़दीर जगा क्यूँ नहीं देता

जो ताब-ए-तमाशा ही नहीं उस में 'रज़ा' तू

वो आतिश-ए-फ़ुर्क़त को बुझा क्यूँ नहीं देता

(950) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554