हर-चंद गाम गाम हवादिस सफ़र में हैं

हर-चंद गाम गाम हवादिस सफ़र में हैं

वो ख़ुश-नसीब हैं जो तिरी रहगुज़र में हैं

ताकीद-ए-ज़ब्त अहद-ए-वफ़ा इज़्न-ए-ज़िंदगी

कितने पयाम इक निगह-ए-मुख़्तसर में हैं

माज़ी शरीक-ए-हाल है कोशिश के बावजूद

धुँदले से कुछ नुक़ूश अभी तक नज़र में हैं

लिल्लाह इस ख़ुलूस से पुर्सिश न कीजिए

तूफ़ान कब से बंद मिरी चश्म-ए-तर में हैं

मंज़िल तो ख़ुश-नसीबों में तक़्सीम हो चुकी

कुछ ख़ुश-ख़याल लोग अभी तक सफ़र में हैं

महफ़िल में उन की सम्त निगाहें न उठ सकीं

हम बिल-ख़ुसूस अहल-ए-नज़र की नज़र में हैं

ये कैसे राह-रौ थे कि हर नक़्श-ए-पा के साथ

सज्दों के कुछ निशान भी इस रहगुज़र में हैं

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