कार-ए-अफ़्ज़ाइश-ए-अनवार-ए-सहर किस ने किया

कार-ए-अफ़्ज़ाइश-ए-अनवार-ए-सहर किस ने किया

सिर्फ़ आफ़ाक़ मिरा रख़्त-ए-सफ़र किस ने किया

बे-हुनर तुझ से मिरा इज्ज़-ए-हुनर पूछता है

मुझ को मातूब सर-ए-शहर-ए-हुनर किस ने किया

दहर-ए-फ़ानी में फ़क़त अहल-ए-क़नाअत के सिवा

ज़िंदगी तुझ को बहर-हाल बसर किस ने किया

ऐ मिरे जज़्ब-ए-अना तेरी बक़ा की ख़ातिर

अपनी तकमील से इस तौर हज़र किस ने किया

तू कि इक ज़र्रा-ए-नाचीज़ था ऐ हुस्न-मआब

तुझ को हम-पाया-ए-ख़ुर्शीद-ओ-क़मर किस ने किया

आज भी दंग है रफ़्तार-ए-ज़माना इस पर

एक पल में कई क़रनों का सफ़र किस ने किया

सोचता हूँ फ़क़त इस दौर के इंसाँ के लिए

हसरत-ओ-यास के मौसम को अमर किस ने किया

महव-ए-हैरत है तहय्युर भी जहाँ पर 'ताबिश'

ऐसे बे-आब-ओ-गियह दश्त को घर किस ने किया

(668) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554