न वो हिज्र में रहीं तल्ख़ियाँ न वो लज़्ज़तें हैं विसाल में

न वो हिज्र में रहीं तल्ख़ियाँ न वो लज़्ज़तें हैं विसाल में

न गुज़र तिरा मिरे ख़्वाब में न मैं गुम हूँ तेरे ख़याल में

न तिरी अदा में वो दिलकशी न मिरी ग़ज़ल में वो ताज़गी

वो ग़ुबार-ए-वक़्त में दब गई जो कशिश थी हुस्न-ओ-जमाल में

मैं तिरी जफ़ा से ख़फ़ा नहीं मुझे तुझ से कोई गिला नहीं

मुझे फ़िक्र क्या है मआल की तुझे क्या मिला है वबाल में

न वो आह-ए-ग़म न वो चश्म-ए-नम न वो लग़्ज़िशें हैं क़दम क़दम

न वो कश्मकश है जवाब में न वो वलवले हैं सवाल में

मुझे कोई फ़िक्र-ए-असास है न ख़याल-ए-होश-ओ-हवास है

दम-ए-ज़िंदगी का हिरास है न तमीज़ है मह-ओ-साल में

(717) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554