जहाँ पे डूब गया था कभी सितारा मिरा
जहाँ पे डूब गया था कभी सितारा मिरा
उसी उफ़ुक़ पे जहाँ-ताब है नज़ारा मिरा
यही हुआ कि परिंदे फ़ज़ा में तैर गए
न काम आईं मिरी बंदिशें न चारा मिरा
हवा-ए-दश्त भी मजनूँ-सिफ़त नहीं है अगर
तो इस मक़ाम पे शायद न हो गुज़ारा मिरा
अभी तो हर्फ़-ए-तमन्ना लिखा नहीं मैं ने
अभी से क्यूँ वरक़-जाँ है पारा पारा मिरा
न आग लगती न तक़्सीम-ए-जिस्म-ओ-जाँ होती
फ़ुग़ाँ कि शहर-ए-सितम पर नहीं इजारा मिरा
वो तीरगी है कि राह-ए-ख़याल भी गुम है
न आसमान है रौशन न इस्तिआरा मिरा
न कोई दश्त मुनव्वर हुआ न दर 'नामी'
नवाह-ए-ग़ैर में जल बुझ गया शरारा मिरा
(501) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
नामी अंसारी