मार डालेगी हमें ये ख़ुश-बयानी आप की

मार डालेगी हमें ये ख़ुश-बयानी आप की

मौत का पैग़ाम आएगा ज़बानी आप की

ज़िंदगी कहते हैं किस को मौत किस का नाम है

मेहरबानी आप की ना-मेहरबानी आप की

बा'द-ए-मुर्दन खींच लाया जज़्ब-ए-दिल सीने पे हाथ

इक अँगूठी में जो पहने था निशानी आप की

बढ़ चुका क़द भी फ़रोग़-ए-हुस्न की हद हो चुकी

अब तो क़ाबिल देखने के है जवानी आप की

आप से मिल के गले राहत से आ जाती है नींद

सब्ज़ा-ए-ख़्वाबीदा है पोशाक धानी आप की

रंग आलम का बदलना आप के सदक़े में है

जम्अ' कर रक्खी थीं पोशाकें पुरानी आप की

आँखों पर बंधवाई पट्टी ता न देखूँ और को

मर गया मैं पर वही है बद-गुमानी आप की

जब वो मुझ को देखता है हँस के कहता है 'रशीद'

कितनी पाबंद-ए-वफ़ा है ज़िंदगानी आप की

(576) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554