अब्र के बिन देखे हरगिज़ ख़ुश दिल-ए-मस्ताँ न हो
अब्र के बिन देखे हरगिज़ ख़ुश दिल-ए-मस्ताँ न हो
तीर बाराँ होवे मुझ पर जब तलक बाराँ न हो
मेरी रुस्वाई ने तेरे हुस्न की की है नुमूद
जब तलक शबनम नहीं रोए तो गुल ख़ंदाँ न हो
तर्ज़ तेरी गुफ़्तुगू की है गवाह-ए-मय-कशी
बू-ए-गुल और नश्शा-ए-सहबा कभी पिन्हाँ न हो
शैख़ को वो जहल है सौ बार का'बे के तईं
जाए और आए व-लेकिन फिर गधा इंसाँ न हो
ज़िक्र-ए-अबरू-ए-बुताँ से क्यूँ बुरा माने है शैख़
क्या हुआ काफ़िर तुझे क़िबले से रू-गर्दां न हो
सच बता ऐ जान-ए-इशक़ ओ इश्क़-बाज़ाँ क्या है तू
बिन तिरे मैं उस बदन सा हूँ कि जिस में जाँ न हो
याँ से जा शैतान ज़ुल्फ़-ए-यार को हम दे चुके
आशिक़ों का दीन है ये शैख़ का ईमाँ न हो
तर्क-ए-ताज़-ए-ग़म्ज़ा का उस की यही डर है 'रज़ा'
ये ग़म-आबाद अपना शहर-ए-दिल कहीं वीराँ न हो
(455) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554