शादी के जो अफ़्साने हैं रंगीन बहुत हैं

शादी के जो अफ़्साने हैं रंगीन बहुत हैं

लेकिन जो हक़ाएक़ हैं वो संगीन बहुत हैं

इबलीस बिचारे ही को बे-कार न कोसो

इंसान के अंदर भी शयातीन बहुत हैं

बख़्शीश की सूरत उन्हें देते रहो रिश्वत

सरकार के दफ़्तर में मसाकीन बहुत हैं

इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी

साबित हुआ दुनिया में ख़्वातीन बहुत हैं

जब हज़रत-ए-नासेह ने किया मुर्ग़ तनावुल

फ़रमाया कि दालों में प्रोटीन बहुत हैं

महसूस हुआ सुन के तक़ारीर-ए-मुग़ल्लज़

अब अहल-ए-सियासत में भी चिर्कीन बहुत हैं

तनख़्वाह का हो जाएगा पल भर में कबाड़ा

बेगम तिरी फ़रमाइशें दो तीन बहुत हैं

ख़दशा है कि उस शोख़ का बढ़ जाए न बी-पी

'शाहिद' तिरे अशआर जो नमकीन बहुत हैं

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