मेरे महबूब मिरे दिल को जलाया न करो

मेरे महबूब मिरे दिल को जलाया न करो

साज़ छेड़ा न करो गीत सुनाया न करो

जाओ आबाद करो अपनी तमन्नाओं को

मुझ को महफ़िल का तमाशाई बनाया न करो

मेरी राहों में जो काँटे हैं तो क्यूँ फूल मिलें

मेरे दामन को उलझने दो छुड़ाया न करो

तुम ने अच्छा ही किया साथ हमारा न दिया

बुझ चुके हैं जो दिए उन को जलाया न करो

मेरे जैसा कोई पागल न कहीं मिल जाए

तुम किसी मोड़ पे तन्हा कभी जाया न करो

ये तो दुनिया है सभी क़िस्म के हैं लोग यहाँ

हर किसी के लिए तुम आँख बिछाया न करो

ज़हर-ए-ग़म पी के भी कुछ लोग जिया करते हैं

उन को छेड़ा न करो उन को सताया न करो

(680) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554