ये आज आए हैं किस अजनबी से देस में हम

ये आज आए हैं किस अजनबी से देस में हम

तड़प गई है नज़र चश्म-ए-आश्ना के लिए

वो हाथ जिन से था कल चाक दामन-ए-अफ़्लाक

वो हाथ आज उठाने पड़े दुआ के लिए

ये मैं ने माना जुदाई मिरा मुक़द्दर है

मगर ये बात न मुँह से कहो ख़ुदा के लिए

ये राह-रौ थे कभी राह-ए-ज़िंदगी का सुराग़

ये राह-रौ कि भटकते हैं रहनुमा के लिए

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In Hindi By Famous Poet Sufi Tabassum. is written by Sufi Tabassum. Complete Poem in Hindi by Sufi Tabassum. Download free  Poem for Youth in PDF.  is a Poem on Inspiration for young students. Share  with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.