शब को फिरे वो रश्क-ए-माह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

शब को फिरे वो रश्क-ए-माह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

दिन को फिरूँ मैं दाद-ख़्वाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

क़िबला न सर-कशी करो हुस्न पे अपने इस क़दर

तुम से बहुत हैं कज-कुलाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

ख़ाना-ख़राब-ए-इश्क़ ने खो के मिरी हया-ओ-शर्म

मुझ को किया ज़लील आह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

तू ने जो कुछ कि की जफ़ा ता-दम-ए-क़त्ल मैं सही

मेरी वफ़ा के हैं गवाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

तेरी कमंद-ए-ज़ुल्फ़ के मुल्क-ब-मुल्क हैं असीर

बिस्मिल-ए-ख़ंजर-निगाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

कल तू ने किस का ख़ूँ किया मुझ को बता कि आज है

शोर ओ फ़ुग़ाँ ओ आह आह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

मुझ को बुला के क़त्ल कर या तो मिरे गुनाह बख़्श

हूँ मैं कहाँ तलक तबाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

सीना-फ़िगार ओ जामा-चाक गिर्या-कुनाँ ओ नारा-ज़न

फिरते हैं तेरे दाद-ख़्वाह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

'ताबाँ' तिरे फ़िराक़ में सर को पटकता रात दिन

फिरता है मिस्ल-ए-महर-ओ-माह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

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