ज़र्द पत्तों को हवा साथ लिए फिरती है
ज़र्द पत्तों को हवा साथ लिए फिरती है
दम-गुज़ीदा हैं क़ज़ा साथ लिए फिरती है
राख हो जाए न फ़ाक़ों के जहन्नम में हयात
बे-कसी अपनी चिता साथ लिए फिरती है
माँ के होंटों से थी निकली दम-ए-रुख़्सत जो दुआ
मुझ को अब तक वो दुआ साथ लिए फिरती है
आस की राख में ढूँडें नई उम्मीद कोई
ज़िंदगी बीम-ओ-रजा साथ लिए फिरती है
सच का है क़हत यहाँ झूट का बाज़ार है गर्म
अब हमें मौज-ए-फ़ना साथ लिए फिरती है
एक पत्थर है बहुत झील के सन्नाटे को
ख़ामुशी कोह-ए-निदा साथ लिए फिरती है
अपने साए से गुरेज़ाँ नहीं इक तू ही 'रबाब'
शहर भर को ये वबा साथ लिए फिरती है
(1191) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554