यार पहलू में निहाँ था मुझे मा'लूम न था

यार पहलू में निहाँ था मुझे मा'लूम न था

तार-ए-गेसू रग-ए-जाँ था मुझे मा'लूम न था

दिल में वो ग़ुंचा वहाँ था मुझे मा'लूम न था

गुल शगूफ़ा में निहाँ था मुझे मा'लूम न था

वो ही नूर-ए-दो-जहाँ था मुझे मा'लूम न था

वही याँ था वही वाँ था मुझे मा'लूम न था

दिल मिरा काबा-ए-जाँ था मुझे मा'लूम न था

नाला गुलबाँग-अज़ाँ था मुझे मा'लूम न था

आँख पर डाल दिया दैर-ओ-हरम का पर्दा

वही दोनों में निहाँ था मुझे मा'लूम न था

सिफ़त-ए-नूर-ए-बसारत वो मिरा पर्दा-नशीं

मेरे पर्दे से अयाँ था मुझे मा'लूम न था

हुस्न-ए-सूरत ने दिया जल्वा-ए-मा'नी का पता

बुत न था संग-ए-निशाँ था मुझे मा'लूम न था

जानिब-ए-काबा-ए-मक़्सूद तन-ए-ज़ार मिरा

रविश-ए-रेग-ए-रवाँ था मुझे मा'लूम न था

बे-ख़बर पढ़ने लगा 'मोमिन'-ओ-'ग़ालिब' का कलाम

कुंज-ए-ख़ल्वत में 'बयाँ' था मुझे मा'लूम न था

(1214) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554